गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत कार्यशाला का आयोजन

पौड़ी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पौड़ी में गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जनपद में संचालित पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केन्द्रों से आये रेडियोलॉजिस्ट, गाइनोकोलोजिस्ट व डाटा सहायकों को उक्त अधिनियम के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 रमेश कुंवर ने कार्यशाला में पीसीपीएनडीटी एक्ट से सम्बन्धित धाराओं व संशोधित नियमों की संक्षिप्त जानकारी देते हुये अल्ट्रासाउंड संचालकों को एक्ट के तहत नियमों का पालन करने हेतु निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जनपद के लिंगानुपात में प्रति 1 हजार पर 957 का सुधार हुआ है। जनपद में अल्ट्रासाउंड केन्द्रों का अधिनियम के तहत समय-समय पर जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति द्वारा निरीक्षण किया जाता है। कहा कि किसी भी केन्द्र में किसी भी तरह की अनियमितता पायी जाती है तो अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही की जाती है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं से सम्बन्धित अभिलेखों का रख रखाव अपने केन्द्र में 02 वर्ष तक आवश्यक रुप से किया जाय।
कार्यक्रम समन्वयक पीसीपीएनडीटी आशीष रावत ने कहा कि लिंग चयन प्रतिषेध से संबन्धित चेतावनी बोर्ड तथा पंजीकरण प्रमाणपत्र को अल्ट्रासाउंड केन्द्रों पर निश्चित स्थान पर चस्पा किया जाना आवश्यक है। साथ ही अधिनियम के तहत रेफरल स्लिप, गर्भवती महिलाओं के पहचान पत्र, अल्ट्रासाउंड की इमेज इनका रख रखाव किया जाना अनिवार्य है। कहा कि अल्ट्रासाउंड केन्द्रों में लिंग चयन को प्रदर्शित करने वाले चित्र पूर्ण रुप से प्रतिबन्धित है। यदि किसी चिकित्सक व पारिवारिक सदस्य यदि लिंग चयन में संलिप्त पाया जाता है, तो इस अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान भी किया जाता है।
कार्यशाला में जिला सलाहकार समिति के सदस्य सचिव आस्था सेवा संस्थान राकेश चन्द्रा, डा0 गौरव पाण्डेय, बाल रोग विशेषज्ञ डा0 ज्योति जोशी ,डा0 गरिमा, डा0 विक्रम सिंह नेगी, डा0 वीना, डा0 निरंजना सहित डाटा सहायक उपस्थित थे।

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