प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दे रेलवेः डॉ. धनसिंह रावत

 

*प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दे रेलवेः डॉ. धनसिंह रावत*

*आरवीएनएल उच्च न्यायालय में दायर मामलों को लेगा वापस*

*भूमिहीन हो चुके 12 परिवारों ने सरकार से की अन्यत्र बसाने की मांग*

*मुआवजा आवंटन को लेकर मुख्य सचिव ने डीएम दिये आवश्यक निर्देश*

देहरादून, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के तहत जनपद पौड़ी के श्रीनगर एवं आस-पास के दर्जनों गांवों के परियोजना प्रभावित परिवारों को दो सप्ताह के भीतर मुआवजा दिये जाने के निर्देश दिये गये हैं। परियोजना से भूमिहीन हुए 12 परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर मुआवजा राशि वितरित करने व रोजगार उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। रेल विकास निगम परियोजना प्रभावितों के विरूद्ध उच्च न्यायालय में दायर सभी मामलों को वापस लेगा।

सचिवायल स्थित मुख्य सचिव सभागार में कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान को लेकर बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें शासन की ओर से मुख्य सचिव, आयुक्त गढ़वाल तथा प्रभावित गांवों के जनप्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में जिलाधिकारी पौड़ी ने भी वर्चुअली प्रतिभाग किया। कैबिनेट मंत्री ने प्रभावित ग्रामीणों को समय पर उचित मुआवजा ने दिये जाने तथा प्रभावित बेरोजगारों को योग्यतानुसार रोजगार न दिये जाने पर नाराजगी जताते हुए आरवीएनएल के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना एक महत्वकांक्षी परियोजना हो जिसको समय पर पूरा करना आवश्यक है। बैठक में निर्णय लिया गया कि रेल विकास निगम लारा कोर्ट के द्वारा दिये गये निर्णयों के आधार पर श्रीनगर के शहरी क्षेत्र के परियोजना प्रभावितों को 11 लाख रूपये प्रति नाली की दर से तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रभावित को 4 लाख 84 हजार रूपये प्रति नाली के दर से मुआवजे का भुगतान करेगा। इसके साथ ही रेल विकास निगम परियोजना प्रभावितों के विरूद्ध उच्च न्यायालय में दायर सभी मामलों को वापस लेगा। आरवीएनएल प्रभावितों परिवारों के बेरोजगार युवाओं को योग्यता के आधार पर परियोजना में रोजगार भी उपलब्ध करायेगा। मुख्य सचिव ने आयुक्त गढ़वाल एवं जिलाधिकारी पौड़ी को समय-समय पर परियोजना की मॉनिटिरिंग करने व परियोजना प्रभावितों को लारा कोर्ट के निर्णय के आधार पर शीघ्र मुआवजा दिलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि परियोजना के चलते जिन गांवों में घरों को आंशिक नुकसान हुआ है उनके आंकलन के लिए एक संयुक्त जांच टीम से सर्वे करा कर मुआवजा दिलाया जाय। बैठक में प्रभावित गांवों के जनप्रतिनिधियों पदमेंद्र सिंह राणा, लखपत भण्डारी, शंकर सिंह राणा आदि ने आरवीएनएल के अधिकारियों पर अलग-अलग मानकों के आधार पर मुआवजा निर्धारित करने का आरोप लगाया। जिस पर मुख्य सचिव ने आयुक्त गढ़वाल मंडल एवं जिलाधिकारी पौड़ी को परियोजना से प्रभावित सभी जनपदों का मुआवजा आवंटन के मानकों का अध्ययन कर एकरूपता लाने के निर्देश दिये। ग्रामीणों ने विगत दो वर्षों से लारा कोर्ट में रिक्त न्यायाधीश के पद को शीघ्र भरने की मांग की।

बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधू, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, आरवीएनएल के मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी, अपर महाप्रबंधक विजय डंगवाल, सुरेन्द्र कुमार, संयुक्त महाप्रबंधक ए.के. शर्मा, उप महाप्रबंधक भूपेन्द्र सिंह, ओ.पी. मालगुडी, पी.पी. बडोगा सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि रामजय असवाल, मुकेश बहुगुणा, पंकज रावत, जितेन्द्र सिंह, शंकर राणा, मुकेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

 

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