अस्पताल व्यवस्थाओं को लेकर डीएम ने दिए कड़े निर्देश

 

पौड़ी: जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, संस्थागत प्रसव, टीबी मुक्त भारत अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पताल व्यवस्थाओं तथा मूलभूत सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को जनपद के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।

बैठक में एसीएमओ डॉ. विनय कुमार त्यागी ने पीसीपीएनडीटी, निक्षय पोषण योजना एवं विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों की जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में वर्तमान में 11 सरकारी एवं 21 निजी अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन केंद्र संचालित हैं। जिलाधिकारी ने प्रस्तावित अल्ट्रासाउंड मशीनों के नवीनीकरण को अनुमति प्रदान करते हुए सभी केंद्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीएमओ शिव मोहन शुक्ला ने जानकारी दी कि जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में रेबीज के टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है।

टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि चिन्हित 395 मरीजों में से 376 का उपचार प्रारंभ किया जा चुका है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शेष सभी मरीजों का उपचार भी तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि टीबी मरीजों की पुनः काउंसिलिंग की जाए तथा नियमित रूप से घर-घर जाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षकों को प्रत्येक माह कम से कम एक बार टीबी मरीजों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी स्थिति की जानकारी लेने के निर्देश भी दिए।

एक्स-रे सेवाओं की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि जिन विकासखंडों में एक्स-रे मशीनें उपलब्ध नहीं हैं, वहां पोर्टेबल मशीनों के माध्यम से जांच सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि नए एक्स-रे तकनीशियनों की नियुक्ति होने तक अस्पतालों की चिकित्सा प्रबंधन समिति की निधि से अस्थायी रूप से तकनीशियनों की व्यवस्था की जाए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए अस्पतालों में दवाओं, उपकरणों एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि महिला चिकित्सा अधिकारियों का मुख्य दायित्व अधिक से अधिक संस्थागत प्रसव सुनिश्चित कराना है। उन्होंने निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिल सके।

जिलाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि वे 31 मई तक

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