डेटा, तकनीक, पारदर्शिता व परिणाम आधारित व्यवस्था से आयेगा सुधार

देहरादून, 24 सितम्बर 2026
सूबे में उच्च शिक्षा व्यवस्था को डाटा, तकनीक, पारदर्शिता एवं परिणाम आधारित बनाने की दृष्टि से विद्या समीक्षा केन्द्र मील का पत्थर साबित होगा। यह केन्द्र समस्त राजकीय महाविद्यालयों में उपलब्ध ढांचागत सुविधाओं, छात्र संख्या एवं मूलभूत सुविधाओं का आॅनलाइन डाटा उपलब्ध रहने के साथ ही शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों के स्थानांतरण एवं पदोन्नति में भी सहायक सिद्ध होगा। विभागीय गतिविधियों को रफ्तार देने के लिये क्षेत्रीय कार्यालय की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रहेगी।

यह बात उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज विद्यालयी शिक्षा निदेशालय ननूरखेड़ा स्थित उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय एवं विद्या समीक्षा केन्द्र के लोकार्पण के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 के तहत राज्य में विद्यालयी शिक्षा विभाग के तहत विद्या समीक्षा केन्द्र का सफल संचालन किया जा रहा है, इसी क्रम में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 5 करोड़ की लागत से क्षेत्रीय कार्यालय एवं विद्या समीक्षा केन्द्र का निर्माण किया गया। जो कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश का पहला विद्या समीक्षा केन्द्र होगा। इस केन्द्र के तहत अब सभी राजकीय महाविद्यालयों के आधारभूत ढांचे, विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, शिक्षकों की कार्य प्रणाली की रियल टाइम माॅनिटरिंग की जायेगी साथ ही शिाक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों के स्थानांतरण एवं पदोन्नति की प्रक्रिया एवं विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम किया जायेगा। डाॅ. रावत ने कहा कि वीएसके के माध्यम से योजनाओं की प्रगति, संसाधनों का उपयोग और संस्थानों के प्रदर्शन की समीक्षा कर उच्च शिक्षा को और गुणवत्तापरक बनाया जायेगा, साथ ही प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर उसका उपयोग नीति निर्माण में किया जायेगा।

इस अवसर पर स्थानीय विधायक उमेश शर्मा काऊ ने उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत की नीतियों व कार्यों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि डाॅ. रावत ने विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक निर्णय लिये हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डा. देवेन्द्र भसीन व डाॅ. जयपाल सिंह चैहान ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 को लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड है। डाॅ. रावत के मार्गदर्शन में प्रदेश में एनईपी का क्रियान्वयन मजबूती से किया जा रहा है। साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्र, शिक्षक एवं शोध के लिये कई योजनाएं संचालित की जा रही है, जिसका लाभ छात्र-छात्राएं उठा रहे हैं।

कार्यक्रम में विधायक रायपुर उमेश शर्मा काऊ, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डा. देवेन्द्र भसीन, डाॅ. जयपाल सिंह चैहान, पूर्व सलाहकार रूसा प्रो. एमएसएम रावत, प्रो. के.डी. पुरोहित, निदेशक एससीईआरटी वंदना गब्र्याल, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. संगीता गुप्ता, डाॅ. ममता ड्यूंडी नैथानी, निदेशक बेसिक शिक्षा के.एस. रावत, रूसा नोडल डा. अनीता रावत सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य व विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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लक्ष्य पवित्र हो तो निर्णय सफल होते हैंः डाॅ. धन सिंह रावत
कार्यक्रम के दौरान डाॅ. रावत ने कहा कि लक्ष्य पवित्र हो तो निर्णय सफल होते हैं। उन्होंने कहा कि देश में उत्तराखंड अकेला राज्य है जिसने छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व दिया। इस निर्णय को देशभर में सराहा गया और कई विश्वविद्यालय अब अपने यहां छात्राओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कोई भी ऐसा महाविद्यालय नहीं है जिसके पास अपनी भूमि व भवन नहीं है। सभी महाविद्यालों में शत-प्रतिशत प्राचार्य व फैकल्टी हैं, छात्रों के प्रोत्साहन के लिये विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही है। विद्यालयी शिक्षा की भांति उच्च शिक्षा में भी उत्कृट कार्य करने शिक्षकों को भक्त दर्शन उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है।

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